Bihar Board 10th Science 21 February Viral Subjective 2026: 21 फ़रवरी 10वीं विज्ञान वायरल सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2026

Bihar Board 10th Science 21 February Viral Subjective 2026: 21 फ़रवरी 10वीं विज्ञान वायरल सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2026 यहां से देखें जो Exam में आएगा।

आज कि इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताने वाले हैं कि किस तरीके से बिहार बोर्ड 10वीं विज्ञान का वायरल प्रश्नपत्र एवं आंसर कैसे डाउनलोड कर सकते हैं। तो यह पोस्ट आपके लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। अतः इस पोस्ट को ध्यान पूर्वक पढ़ते हुए आगे बढ़ें।

Bihar Board 10th Science 21 February Viral Subjective 2026: 21 फ़रवरी 10वीं विज्ञान वायरल सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2026

अगर आप इन सभी प्रश्न को पढ़ के परीक्षा में जाते है तो आप अपने परीक्षा मे बेहतर कर सकते है तो इसके लिए आप हमारे साथ इस लेख में अंतिम तक आवश्य बने रहे.

1. अवतल दर्पण का उपयोग हजामती दर्पण के रूप में क्यों किया जाता है?

उत्तर – अवतल दर्पण का आकार इस तरह का होता है कि यह प्रकाश की किरणों को एक बिंदु (फोकस) पर इकट्ठा कर देता है। हजामती दर्पण में इसका उपयोग किया जाता है क्योंकि यह चेहरे के बालों की हर दिशा में विस्तार से झलक दिखाने के लिए प्रयोग में आता है, जिससे हजामत बनाते समय बालों का स्पष्ट रूप से निरीक्षण किया जा सकता है।

2. पानी में रखा सिक्का उठा हुआ दिखता है। क्यों?

उत्तर – यह परिघटना अपवर्तन (Refraction) के कारण होती है। जब हम पानी में सिक्के को देखते हैं, तो प्रकाश पानी से बाहर और फिर हमारी आँखों में प्रवेश करता है, जिससे सिक्का वास्तविक स्थान से ऊपर दिखाई देता है। पानी और हवा के बीच अपवर्तनांक में अंतर होने के कारण यह प्रभाव उत्पन्न होता है।

3. दृष्टि दोष क्या है? यह कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर – दृष्टि दोष वह स्थिति है जब आंखें वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाती हैं। इसके मुख्य दो प्रकार होते हैं:

  • मायोपिया (नजदीक दृष्टि दोष): इसमें व्यक्ति को दूर की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं।
  • हाइपरमेट्रॉपिया (दूरदृष्टि दोष): इसमें व्यक्ति को पास की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं।

4. प्रकाश का वर्ण विक्षेपण क्या है? स्पेक्ट्रम कैसे बनता है?

उत्तर – वर्ण विक्षेपण (Dispersion of light) उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें सफेद प्रकाश विभिन्न रंगों में बंट जाता है। जब सफेद प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम, जैसे कि काँच या पानी, से गुजरता है, तो इसके विभिन्न रंगों की लहरें अलग-अलग ढंग से मोड़ती हैं। इससे प्रकाश के रंग (लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो, बैंगनी) का स्पेक्ट्रम बनता है। यह प्रक्रिया रेनबो (इंद्रधनुष) के रूप में दिखाई देती है।

5. ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रिया क्या है? उदाहरण दीजिए।

उत्तर –

  • ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic reaction): ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें ऊर्जा (आमतौर पर गर्मी) बाहर निकलती है। उदाहरण के लिए, जलाने की अभिक्रिया (जैसे लकड़ी जलाना) एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, जिसमें गर्मी बाहर निकलती है।
  • ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic reaction): ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें ऊर्जा (आमतौर पर गर्मी) अवशोषित होती है। उदाहरण के लिए, पानी का वाष्पीकरण (पानी का उबालना) एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है, जिसमें गर्मी अवशोषित होती है।

6. धोबिया सोडा और बेकिंग सोडा में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर –

  • धोबिया सोडा (Washing Soda): इसका रासायनिक सूत्र NaCO·10HO है। यह सोडियम कार्बोनेट का हाइड्रेटेड रूप है और इसका उपयोग कपड़े धोने, जल शोधन, आदि में किया जाता है।
  • बेकिंग सोडा (Baking Soda): इसका रासायनिक सूत्र NaHCO है। यह सोडियम बाइकार्बोनेट है और आमतौर पर बेकिंग में खमीर के रूप में उपयोग किया जाता है।

मुख्य अंतर: धोबिया सोडा में पानी के अणु जुड़े होते हैं, जबकि बेकिंग सोडा में ऐसा नहीं होता है।

7. जस्ता के दो अयस्कों के नाम एवं सूत्र लिखें।

उत्तर –

  • ज़िंक ब्लेंड (Zinc Blende): इसका रासायनिक सूत्र ZnS है।
  • कैलामाइन (Calamine): इसका रासायनिक सूत्र ZnCO है।

सजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण दें। उत्तर – सजातीय श्रेणी (Homogeneous Mixture): यह वह मिश्रण होते हैं जिनमें सभी अवयव पूरी तरह से समान रूप से मिश्रित होते हैं और किसी भी भाग में भिन्नता नहीं होती। उदाहरण के लिए, पानी में नमक घोलना। इस मिश्रण में नमक पूरी तरह से पानी में घुलकर एक समान घोल बना लेता है।

8. प्रकाश संश्लेषण से आप क्या समझते है? समीकरण दें।

उत्तर – प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) एक जैविक प्रक्रिया है, जिसमें पादप (और कुछ बैक्टीरिया) सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपने लिए भोजन (ग्लूकोज) बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इस प्रक्रिया में प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदल जाती है।
समीकरण:
6CO₂ + 6H₂O + प्रकाश ऊर्जा → C₆H₁₂O₆ + 6O₂

9. किण्वन क्या है? इसका समीकरण लिखें।

उत्तर – किण्वन (Fermentation) एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कुछ सूक्ष्मजीव (जैसे यीस्ट) कार्बोहाइड्रेट (जैसे ग्लूकोज) को बिना ऑक्सीजन के तोड़ते हैं और ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इसमें एल्कोहल (एथनॉल) और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होते हैं।
समीकरण:
C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂
(ग्लूकोज → एथनॉल + कार्बन डाइऑक्साइड)

10. जाइलम तथा फ्लोएम में क्या अंतर है?

उत्तर – 

  • जाइलम (Xylem): यह पादप के ऊतक हैं जो जल और खनिज लवण को जड़ से पत्तियों तक प्रवाहित करते हैं। यह एक दिशा में, ऊपर की ओर, जल परिवहन करता है।
  • फ्लोएम (Phloem): यह पादप के ऊतक हैं जो पत्तियों से अन्य भागों (जैसे, जड़, तना) तक खाद्य पदार्थ (मुख्य रूप से ग्लूकोज) का परिवहन करते हैं। फ्लोएम का परिवहन द्विदिशात्मक होता है।

11. पादप हार्मोन क्या है? उत्तर – पादप हार्मोन (Plant Hormones) ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो पादपों में वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। ये हार्मोन पादप के विभिन्न अंगों में छोटे मात्रा में उत्पन्न होते हैं और कोशिकाओं के विभाजन, वृद्धि, और अन्य जैविक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं। कुछ प्रमुख पादप हार्मोन हैं: ऑक्सिन, गिब्बेरेलिन, सायटोकिनिन, एथिलीन, और ऐब्सिसिक एसिड।

12. प्रकाश का अपवर्तन क्या है? इसके नियमों को लिखें।

उत्तर – प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of light) वह प्रक्रिया है, जिसमें प्रकाश की किरण जब एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी गति और दिशा में बदलाव होता है। यह बदलाव दोनों माध्यमों के अपवर्तनांक (refractive index) के आधार पर होता है।
अपवर्तन के नियम:

  • पहला नियम: जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो अपवर्तन रेखा, आपतन रेखा और सामान्य रेखा (आधार रेखा) एक ही तल में होती हैं।
  • दूसरा नियम: अपवर्तन कोण और आपतन कोण के बीच संबंध इस प्रकार होता है:
    = = μ

जहाँ iआपतन कोण, r अपवर्तन कोण, और  दोनों माध्यमों की गति, और μ अपवर्तनांक है।)

13. उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस क्यों कहा जाता है?

उत्तर – उत्तल लेंस (Convex lens) को अभिसारी लेंस (Converging lens) कहा जाता है क्योंकि यह प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर एकत्रित करता है (फोकस पर)। यह लेंस मध्य में मोटा और किनारों में पतला होता है, जो प्रकाश की किरणों को एक जगह पर इकट्ठा करता है।

14. ओम के नियम को लिखें।

उत्तर – ओम का नियम (Ohm’s Law) यह कहता है कि किसी चालक के द्वारा प्रवाहित विद्युत धारा (I) उस पर लगाए गए विद्युत दाब (V) के अनुपाती और चालक की रोध (resistance, R) के समानुपाती होती है।
इसका समीकरण है:
V = I × V = I

यहाँ V = विद्युत दाब (Voltage), I = विद्युत धारा (Current), और R = रोध (Resistance) है।

15. नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है? उत्तर – नेत्र की समंजन क्षमता (Power of accommodation) से अभिप्राय है, आँख की वह क्षमता जिससे यह निकट और दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाती है। जब हम किसी वस्तु को नज़दीक या दूर देखते हैं, तो आँख की लेंस की आकृति बदल जाती है, ताकि वह वस्तु स्पष्ट रूप से दिखाई दे। यह समंजन क्षमता लेंस की रूपरेखा को बदलकर प्राप्त होती है।

16. संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?

उत्तर – संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced chemical equation) वह रासायनिक समीकरण है जिसमें अभिक्रिया में शामिल सभी तत्वों की मात्रा (परमाणु) दोनों पक्षों पर समान होती है। अर्थात, अभिकारक और उत्पादों में किसी भी तत्व का परमाणु संख्या बराबर होती है।
संतुलित करने का कारण:
रासायनिक अभिक्रिया में परमाणुओं का संचय और नष्ट नहीं होता है, इसलिए यह आवश्यक है कि समीकरण में हर तत्व का परमाणु संख्या समान हो। संतुलित समीकरण से हमें सही मात्रा में पदार्थों की आवश्यकता और उत्पन्न होने वाले पदार्थों का सही अनुमान मिलता है।

16. अपचयन-उपचयन (रेडॉक्स) अभिक्रिया क्या है?

उत्तर – रेडॉक्स (Redox) अभिक्रिया दो प्रक्रियाओं का संयोजन है:

  • अपचयन (Oxidation): किसी पदार्थ का इलेक्ट्रॉन खोना।
  • उपचयन (Reduction): किसी पदार्थ का इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना।
    इन दोनों प्रक्रियाओं का एक साथ होना रेडॉक्स अभिक्रिया कहलाता है। उदाहरण:
    2Na + Cl2 →2NaCl2Na + Cl

यहां, सोडियम (Na) अपचयित हो रहा है (इलेक्ट्रॉन दे रहा है) और क्लोरीन (Cl₂) उपचयित हो रहा है (इलेक्ट्रॉन ले रहा है)।

17. ब्लीचिंग पाउडर बनाने की विधि एवं उपयोगिता लिखें।

उत्तर – ब्लीचिंग पाउडर का निर्माण कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (Ca(OH)₂) और क्लोरीन गैस (Cl₂) के प्रतिक्रिया से किया जाता है।
Ca(OH)2+Cl2→Ca(OCl)2+H2OCa(OH)_2 + Cl

इस प्रक्रिया में कैल्शियम हाइड्रोक्साइड से ब्लीचिंग पाउडर (कैल्शियम हाइपोक्लोराइट) बनता है।

उपयोगिता:

  • ब्लीचिंग पाउडर का मुख्य उपयोग ब्लीचिंग, कपड़े सफेद करने, कीटाणुनाशक और जल शोधन में किया जाता है।
  • यह औद्योगिक उपयोगों में भी है जैसे कि कागज उद्योग में ब्लीचिंग एजेंट के रूप में।

18. उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा? उत्तर – उत्कृष्ट गैसें (Noble gases) जैसे हीलियम (He), नियोन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टन (Kr), ज़ेनॉन (Xe) और रेडॉन (Rn) को एक अलग समूह में रखा जाता है क्योंकि ये गैसें रासायनिक रूप से स्थिर और कम प्रतिक्रियाशील होती हैं। इनकी स्थिरता का कारण इनका पूर्ण बाह्य इलेक्ट्रॉन मण्डल है, जिससे ये गैसें आसानी से अन्य तत्वों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करतीं।

19. स्वपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है?

उत्तर –

  • स्वपोषी पोषण (Autotrophic nutrition): इसमें जीव स्वयं अपने भोजन का निर्माण करते हैं। वे प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) या रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा अपनी ऊर्जा प्राप्त करते हैं। उदाहरण: पादप, शैवाल, और कुछ बैक्टीरिया।
  • विषमपोषी पोषण (Heterotrophic nutrition): इसमें जीव बाहरी स्रोतों से तैयार भोजन का सेवन करते हैं। यह पोषण जीवन के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा, आदि प्राप्त करता है। उदाहरण: मनुष्य, पशु, और कुछ बैक्टीरिया।

20. परिसंचरण तंत्र से आप क्या समझते हैं?

उत्तर – परिसंचरण तंत्र (Circulatory system) शरीर में रक्त और अन्य तरल पदार्थों का संचलन करने वाला तंत्र है। इसका मुख्य कार्य शरीर के विभिन्न भागों तक ऑक्सीजन, पोषक तत्व, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करना है। मनुष्यों में परिसंचरण तंत्र में दिल (हृदय), रक्तवाहिकाएं (arteries, veins, capillaries) और रक्त शामिल होते हैं।

21. मनुष्य में होने वाले लैंगिक संचारित रोगों के नाम लिखें।

उत्तर – मनुष्यों में होने वाले कुछ सामान्य लैंगिक संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases – STDs) हैं:

  1. एचआईवी / एड्स (HIV / AIDS)
  2. सिफिलिस (Syphilis)
  3. गोनोरिया (Gonorrhea)
  4. हर्पीज (Herpes)
  5. क्लैमिडिया (Chlamydia)
  6. हीपटाइटिस B (Hepatitis B)

22. उत्सर्जन की परिभाषा दें। उत्सर्जी पदार्थ क्या है?

उत्तर –उत्सर्जन (Excretion) वह जैविक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर द्वारा उपयोग के बाद अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। यह शरीर को हानिकारक पदार्थों से मुक्त करने में मदद करता है।
उत्सर्जी पदार्थ (Excretory products) वे पदार्थ होते हैं जो शरीर में उत्सर्जन प्रक्रिया के द्वारा बाहर निकाले जाते हैं। उदाहरण के लिए: यूरिया, अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड, पानी आदि।

23. प्रकाश के परावर्तन के नियमों को लिखें।

उत्तर –

  • पहले नियम के अनुसार, जब प्रकाश एक समतल सतह से टकराता है, तो वह उसी सतह पर वापस लौटता है।
  • दूसरा नियम यह कहता है कि परावर्तित प्रकाश का कोण, गिरने वाले प्रकाश के कोण के बराबर होता है। यानी, परावर्तन का कोण (i) गिरने के कोण (r) के बराबर होता है।

24. नेत्र की समंजन क्षमता से क्या समझते है?

उत्तर – समंजन क्षमता से तात्पर्य उस क्षमता से है जिसके द्वारा आंख विभिन्न दूरी पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकती है। यह क्षमता लेंस के आकार में बदलाव के कारण होती है, जिससे प्रकाश किरणें सही जगह पर फोकस होती हैं।

25. उत्तम ईंधन से आप क्या समझते है?

उत्तर – उत्तम ईंधन वह है जो अधिकतम ऊर्जा प्रदान करता है, आसानी से जलता है, और प्रदूषण कम उत्पन्न करता है। उत्तम ईंधन का एक उदाहरण प्राकृतिक गैस है।

26. विद्युत मोटर के सिद्धांत को लिखें। उत्तर – विद्युत मोटर का सिद्धांत विद्युत चुम्बकीय प्रेरणा पर आधारित है। जब एक चालक (wire) को चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत धारा के साथ रखा जाता है, तो उस पर बल लगता है, जिससे चालक गति करने लगता है। यह सिद्धांत मोटर के कार्य को संचालित करता है।

27. विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अन्तर है? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।

उत्तर –      

  • विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): इसमें एक तत्व दूसरे तत्व को अपने यौगिक से निकालकर स्थान पर कब्जा कर लेता है। उदाहरण:
    Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu

 यहाँ जिंक (Zn) कॉपर (Cu) को विस्थापित करता है।

  • द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): इसमें दो यौगिक एक-दूसरे के साथ आदान-प्रदान करते हैं। उदाहरण:
    NaCl + AgNO3 → NaNO3 + AgCl

 यहाँ दो यौगिकों के घटक आपस में बदलते हैं।

28. पीतल एवं ताँबे के बरतनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?

उत्तर – पीतल (Brass) और ताँबा (Copper) धातुएं खट्टे पदार्थों, जैसे दही, के साथ प्रतिक्रिया करती हैं और रासायनिक परिवर्तन उत्पन्न करती हैं। इससे उन पदार्थों में विषाक्त तत्व (जैसे कॉपर और जिंक के यौगिक) मिल सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

29. किण्वन की क्रिया क्या है? इसमें कौन-सी गैस निकलती है?

उत्तर – सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) का जलीय विलयन क्षारीय होता है क्योंकि यह जल में घुलने पर सोडियम आयन (Na⁺) और कार्बोनेट आयन (CO₃²⁻) में विभाजित हो जाता है। कार्बोनेट आयन पानी के हाइड्रोजन आयनों (H⁺) के साथ प्रतिक्रिया करके बाइकार्बोनेट आयन (HCO₃⁻) और हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) उत्पन्न करता है, जिससे विलयन में क्षारीयता बढ़ जाती है। CO3 2−+ H2O → HCO3 −+ OH

30: हाइड्रोकार्बन क्या है? यह कितने प्रकार का होता है?

उत्तर – हाइड्रोकार्बन वह यौगिक हैं जो केवल हाइड्रोजन और कार्बन से बने होते हैं। हाइड्रोकार्बन दो प्रकार के होते हैं:

  1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Alkanes): ये केवल सिंगल बॉन्ड से जुड़े होते हैं। उदाहरण: मेथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆)।
  2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन: इनमें डबल या ट्रिपल बॉन्ड होते हैं।
    1. एलेक्टीन्स (Alkenes): डबल बॉन्ड वाले हाइड्रोकार्बन। उदाहरण: एथीलीन (C₂H₄)।

एलीन्स (Alkynes): ट्रिपल बॉन्ड वाले हाइड्रोकार्बन। उदाहरण: एसीटिलीन (C₂H₂)।

31. रक्त के दो कार्य लिखें।

उत्तर – रक्त के दो कार्य:

  • ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का परिवहन: रक्त शरीर के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों को पहुँचाता है।
  • वस्तुओं का उत्सर्जन: रक्त, शरीर के विभिन्न अंगों से अपशिष्ट पदार्थ (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड) को लेकर उसे उत्सर्जन अंगों तक पहुँचाता है।

32. नेफ्रॉन क्या है?

उत्तर – नेफ्रॉन, वृक्क (किडनी) का कार्यात्मक और संरचनात्मक घटक होता है। यह रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को छानने और मूत्र बनाने की प्रक्रिया में सहायक होता है। प्रत्येक किडनी में लाखों नेफ्रॉन होते हैं जो रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करते हैं।

33. तंत्रिका तंत्र के क्या कार्य है?

उत्तर – तंत्रिका तंत्र शरीर के विभिन्न भागों में संकेतों का संचार करता है। यह शरीर की गति, अनुभूति, सोच, और विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करता है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के माध्यम से शरीर के अंगों तक तंत्रिका संदेश भेजता है।

34. मुकुलन क्या है?

उत्तर – मुकुलन (Budding) एक प्रकार का प्रजनन तरीका है, जिसमें एक नई जीवित इकाई (नया जीव) मूल जीव के शरीर से बाहर उभरकर बनती है। यह आमतौर पर वनस्पतियों और कुछ जलीय जीवों में पाया जाता है। उदाहरण: हाइड्रा में मुकुलन द्वारा नए हाइड्रास उत्पन्न होते हैं।

35. मेंडलीफ के आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी में क्या अंतर है?

उत्तर – 

  1. आधारित परिभाषा:
    1. मेंडलीफ की आवर्त सारणी तत्वों को उनके आणविक भार के आधार पर क्रमबद्ध करती है, जबकि आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों को उनके परमाणु संख्या के आधार पर क्रमबद्ध करती है।
  2. अवधारणाएँ:
    1. मेंडलीफ ने आवर्त सारणी में तत्वों के गुणों का पालन करते हुए कुछ तत्वों के स्थानों को छोड़ दिया था, जबकि आधुनिक आवर्त सारणी में यह छूटे हुए स्थान नहीं होते, और यह अधिक सटीक है।
  3. समस्याएँ:
    1. मेंडलीफ की आवर्त सारणी में कुछ तत्वों के गुणों के आधार पर स्थानों को बदलने की आवश्यकता पड़ी, जिससे कुछ असंगतियाँ थीं। आधुनिक आवर्त सारणी में यह समस्या हल हो गई है क्योंकि यह तत्वों की परमाणु संख्या पर आधारित है।
  4. आवर्तता:
    1. मेंडलीफ की आवर्त सारणी में आवर्तता (periodicity) के सिद्धांत का पालन किया गया था, लेकिन यह सिद्धांत पूरी तरह से स्पष्ट नहीं था। आधुनिक आवर्त सारणी में यह सिद्धांत सटीक और स्पष्ट है।

इस प्रकार, आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों के गुणों और उनका आवर्त्य (periodicity) बहुत बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया गया है।

36. मानव नर तथा मादा जनन हार्मोनों के नाम एवं कार्य लिखें।

उत्तर –   नर जनन हार्मोन (Male Sex Hormones):

  • टेस्टोस्टेरोन: यह हार्मोन पुरुषों में अंडकोष (testes) द्वारा उत्पादित होता है। यह पुरुषों के लक्षण जैसे कि दाढ़ी, मांसपेशियों का विकास, और शुक्राणु निर्माण को नियंत्रित करता है।
  • कार्य: पुरुष जननांगों का विकास, यौन व्यवहार को प्रभावित करना, और शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा देना।

मादा जनन हार्मोन (Female Sex Hormones):

  • एस्त्रोजन: यह हार्मोन महिलाओं में अंडाशय (ovaries) द्वारा उत्पन्न होता है। यह महिला लक्षण जैसे स्तन विकास, मासिक धर्म चक्र, और गर्भावस्था को नियंत्रित करता है।
  • कार्य: महिला जननांगों का विकास, स्तन विकास, और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करना।
  • प्रोजेस्टेरोन: यह हार्मोन भी अंडाशय द्वारा उत्पन्न होता है और गर्भावस्था के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्य: गर्भाशय की अस्तर को स्थिर करना और गर्भधारण को बनाए रखना।

37. डायनेमों (विद्युत जनित्र) क्या है? इसके क्रिया सिद्धांत और कार्यविधि का सचित्र वर्णन करें।

उत्तर – डायनेमो (विद्युत जनित्र) क्या है?

डायनेमो एक विद्युत यंत्र है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। इसे विद्युत जनित्र भी कहा जाता है। यह एक प्रकार का विद्युत जनरेटर है, जो विशेष रूप से सिधे धारा (DC) उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है। डायनेमो में एक चुंबकीय क्षेत्र और एक आवर्तक (rotating) कुंडली का प्रयोग होता है ताकि यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न हो सके।

क्रिया सिद्धांत:

डायनेमो का कार्य मुख्य रूप से इंद्रियन नियम (Faraday’s Law of Induction) पर आधारित होता है। जब एक कंडक्टर (जैसे तार की कुंडली) चुंबकीय क्षेत्र के अंदर गति करता है, तो उसमें विद्युत धारा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (electromagnetic induction) कहा जाता है। जब डायनेमो में किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उस कुंडली के अंदर विद्युत प्रवाह उत्पन्न होता है, और यह प्रवाह बाहर के विद्युत परिपथ में जाता है, जिससे विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।

कार्यविधि:

  1. कुंडली और चुंबकीय क्षेत्र:
    1. डायनेमो में एक कुंडली होती है जो ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र के बीच घूमती है।
    1. चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और कुंडली की गति के कारण, कुंडली में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
  2. घुमाव:
    1. डायनेमो में एक घूर्णनशील शाफ्ट होती है, जो किसी यांत्रिक शक्ति द्वारा घुमाई जाती है। यह घूर्णन कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमा देता है।
  3. विद्युत धारा:
    1. जैसे-जैसे कुंडली घूमती है, चुंबकीय रेखाएँ कुंडली से होकर गुजरती हैं, जिससे उसमें विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
  4. कलेक्टर रिंग:
    1. डायनेमो में एक कलेक्टर रिंग (commutator) होता है, जो उत्पन्न धारा को सही दिशा में लाने के लिए काम करता है। यह सुनिश्चित करता है कि धारा एक दिशा में प्रवाहित हो।

सचित्र (Diagram):

  • एक साधारण डायनेमो का चित्र इस प्रकार दिखता है:

38. एलुमिनियम धातु का निष्कर्षण उसके अयस्क से कैसे किया जाता है?

उत्तर – एलुमिनियम धातु का निष्कर्षण मुख्य रूप से उसके अयस्क बॉक्साइट (Bauxite, Al₂O₃) से किया जाता है। यह प्रक्रिया हॉल-हैरोल्ट प्रक्रिया (Hall-Héroult process) के नाम से प्रसिद्ध है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण होते हैं:

  1. बॉक्साइट का शुद्धीकरण:
    सबसे पहले बॉक्साइट को NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) के साथ उबालकर सोडियम अलुमिनेट (NaAlO₂) और बक्साइट के अवशेष (रेड स्लज) अलग कर दिए जाते हैं। इस प्रक्रिया को बायर्स प्रक्रिया कहा जाता है।

Al2O3+2NaOH→2NaAlO2+H2OAl_2O_

  • हॉल-हैरोल्ट प्रक्रिया:
    शुद्ध अलुमिना (Al₂O₃) को कार्बन के साथ इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis) द्वारा उच्च तापमान पर अपघटित किया जाता है। इसमें, अलुमिना को पिघला हुआ क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) में घोल कर एक इलेक्ट्रोलाइट के रूप में उपयोग किया जाता है।

2Al2O3(l)→4Al(l)+3O2(g)

 इस प्रक्रिया में एलुमिनियम धातु के रूप में उत्पन्न होती है, जबकि ऑक्सीजन गैस इलेक्ट्रोड से निकलती है। इस प्रकार, बॉक्साइट से एलुमिनियम धातु का निष्कर्षण किया जाता है।

39. ऑक्सी एवं अनॉक्सी श्वसन में अंतर लिखें एवं अनॉक्सी श्वसन की क्रिया विधि लिखें।

उत्तर –

  • ऑक्सी श्वसन (Aerobic respiration): इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन की उपस्थिति में भोजन (आमतौर पर ग्लूकोज) को तोड़ा जाता है, जिससे ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसका समीकरण है:

C6H12O6+6O2→6CO2+6H2O+ऊर्जा

इसमें ऊर्जा का उत्पादन उच्च होता है।

  • अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic respiration): इस प्रक्रिया में बिना ऑक्सीजन के भोजन को तोड़ा जाता है। यह श्वसन सामान्यतः छोटे जीवों में या ऑक्सीजन की कमी वाली स्थितियों में होता है। इसका समीकरण है:

C6H12O6→2C2H5OH+2CO2+ऊर्जा

(यह प्रक्रिया एथनॉल (एल्पोहल) और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन करती है, जैसे यीस्ट में होता है।)

अनॉक्सी श्वसन की क्रिया विधि:

  • ग्लूकोज का अपघटन: सबसे पहले ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆) का अपघटन होता है, जो पायरूवेट (Pyruvate) में बदल जाता है।

पायरूवेट का परिवर्तन: पायरूवेट के बिना ऑक्सीजन के विभिन्न उत्पादों में रूपांतरण होता है, जैसे कि एथनॉल (जब यीस्ट में होता है) या लैक्टिक एसिड (मनुष्य के मांसपेशियों में शारीरिक श्रम के दौरान)।
इस प्रक्रिया में ऊर्जा का उत्पादन कम होता है, लेकिन यह जीवों के लिए जल्दी ऊर्जा प्राप्त करने का एक तरीका है।

40. दृष्टि दोष क्या है? यह कितने प्रकार के होते हैं ? इसका निवारण कैसे किया जाता है?

उत्तर – दृष्टि दोष उस स्थिति को कहते हैं जब आंख किसी वस्तु को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाती है। यह दोष तब होता है जब आंख की समंजन क्षमता सही से काम नहीं करती। दृष्टि दोष के मुख्य प्रकार हैं:

  1. नज़दीक दृष्टिहीनता (Myopia): इसमें व्यक्ति को दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं, लेकिन नज़दीकी वस्तुएं साफ दिखाई देती हैं। इसका कारण यह है कि आंख का लेंस अधिक तीव्र रूप से झुकता है और चित्र रेटिना के सामने बनता है। इसका निवारण चौकोर (concave) लेंस से किया जाता है।
    1. दूरदृष्टि (Hypermetropia): इसमें व्यक्ति को नज़दीकी वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं, जबकि दूर की वस्तुएं स्पष्ट होती हैं। इसका कारण यह है कि आंख का लेंस कम तीव्र रूप से झुकता है और चित्र रेटिना के पीछे बनता है। इसका निवारण उत्तल (convex) लेंस से किया जाता है।
    1. अस्थिर दृष्टि (Astigmatism): इसमें आंख की लेंस की आकृति असममित होती है, जिसके कारण व्यक्ति को हर दिशा में धुंधला दृष्टि होता है। इसका इलाज सिलेंड्रिकल लेंस से किया जाता है।
    1. प्रेसबायोपिया (Presbyopia): यह वृद्धावस्था में होने वाला दृष्टि दोष है, जिसमें आंख की लेंस का लचीलापन कम हो जाता है, और व्यक्ति को नज़दीकी वस्तुएं देखने में कठिनाई होती है। इसका निवारण द्वय लेंस (bifocal lenses) से किया जाता है।

इन दृष्टि दोषों का निवारण चश्मे, कांटेक्ट लेंस या सर्जरी द्वारा किया जा सकता है।

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